2024 से, मलेशिया सरकार की राष्ट्रीय नशा-विरोधी एजेंसी (एएडिके) ने प्रेम रावत फाउंडेशन (टीपीआरएफ) के साथ मिलकर नशे से उबर रहे लोगों की मदद की है। इस सहयोग के तहत, टीपीआरएफ का पीस एजुकेशन प्रोग्राम मलेशिया के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में लागू किया गया है, जहाँ लोगों में आत्म-जागरूकता, भावनाओं की स्पष्टता, उम्मीद और प्रेरणा में सुधार देखा गया है।
“काश मैंने यह संदेश पहले सुना होता – तो मैं ज़िंदगी में गलत फैसले नहीं करता,” कार्यक्रम के एक प्रतिभागी ने कहा।
नशीले पदार्थों की लत मलेशिया के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है; इस समस्या से निपटने के लिए एएडिके, गृह मंत्रालय के अधीन, मलेशिया की प्रमुख एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है। यह एजेंसी मुख्य रूप से नशीले पदार्थों के प्रति जागरूकता (निवारक शिक्षा), कानून प्रवर्तन और सुरक्षा कार्यक्रमों, तथा उपचार और पुनर्वास कार्यक्रमों पर ध्यान देती है। मलेशियाई सरकार ने विभिन्न पुनर्वास केंद्र और चिकित्सीय कार्यक्रम स्थापित किए हैं, जिनमें छह ऐसे केंद्र भी शामिल हैं जहाँ टीपीआरएफ अब तक अपना ‘शांति शिक्षा कार्यक्रम’ (पीस एजुकेशन प्रोग्राम) तमिल भाषा में संचालित कर पाया है।

इस कार्यक्रम को लागू करने का काम कल्कि कार्ल ने किया, जो एक रजिस्टर्ड मनोवैज्ञानिक हैं और जिन्हें नशीली दवाओं की रोकथाम से जुड़ी शिक्षा के क्षेत्र में 30 साल का पेशेवर अनुभव है। इसी अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने मलेशिया के सरकारी केंद्रों में इलाज और पुनर्वास से गुज़र रहे लोगों के लिए ‘शांति शिक्षा कार्यक्रम’ (पीस एजुकेशन प्रोग्राम) शुरू किया। आज, 20 प्रशिक्षित स्वयंसेवक पूरे मलेशिया में छह केंद्रों पर इस शांति शिक्षा कार्यक्रम को चला रहे हैं; वहीं, सातवें केंद्र में भी इस अप्रैल, 2026 से यह कार्यक्रम शुरू होने की उम्मीद है।
जिन जिलों में यह कार्यक्रम लागू किया गया है, वहाँ के प्रतिभागियों ने बताया कि इन वर्कशॉप्स ने उन्हें खुद को, खासकर अपनी भावनाओं, विचारों और अपनी जिम्मेदारी के एहसास को बेहतर समझने में मदद की है।
“2025 में, मैंने नफ़रत, गुस्सा, लालच और खुद पर शक के बीज बोए थे; लेकिन 2026 में, मैं प्यार, स्पष्टता, शांति, खुशी और सकारात्मकता के बीज बोना चाहता हूँ—न कोई नशा, बस आगे बढ़ना और दूसरों की बात सुनना,” एक प्रतिभागी ने कहा। जोहोर राज्य के अन्य प्रतिभागियों ने भी जीवन में नई उम्मीद जताई और व्यक्तिगत विकास तथा बदलाव के लिए नई संभावनाएँ महसूस कीं।
टीपीआरएफ का पीस एजुकेशन प्रोग्राम 10 रचनात्मक, वीडियो-आधारित वर्कशॉप्स की एक श्रृंखला है, जिसका उद्देश्य लोगों को अपनी आतंरिक शक्ति और व्यक्तिगत शांति को खोजने में मदद करना है। यह प्रोग्राम 45 से अधिक भाषाओं में मुफ्त उपलब्ध है और 2015 से मलेशिया सहित 80 से ज्यादा देशों में प्रस्तुत किया जा चुका है। हर वर्कशॉप में व्यक्तिगत सोच-विचार के लिए समय दिया जाता है, और इसे एक व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाता है। हर वर्कशॉप इन 10 विषयों में से किसी एक पर केंद्रित होती है: शांति, सराहना, आंतरिक शक्ति, अपने आपको जानना, स्पष्टता, समझ, गरिमा, चयन, आशा और तृप्ति|

टीपीआरएफ को पहली बार 2024 में एएडिके के मुख्यालय, सेलांगोर, जो मलेशिया के पश्चिमी तट के मध्य भाग में स्थित एक राज्य है, में पीस एजुकेशन प्रोग्राम शुरू करने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम में उपचार और पुनर्वास विभाग के निदेशक शामिल हुए थे, और इसके तुरंत बाद टीपीआरएफ को सेलांगोर के तीन जिलों में इस प्रोग्राम को चलाने का अवसर मिला। 2025 तक, इस प्रोग्राम का विस्तार मलेशिया के दो और राज्यों, जोहोर और पेराक तक हो गया। 2026 तक, यह आगे बढ़कर दो और जिलों में भी शुरू हो गया। 2026 तक, मलेशिया के राष्ट्रीय पुनर्वास केंद्रों में 250 लोग इस पीस एजुकेशन प्रोग्राम से लाभ ले चुके हैं।
मलेशिया के सरकारी पुनर्वास केंद्रों में पीस एजुकेशन प्रोग्राम में भाग लेने वाले कई लोगों ने बताया कि इन सत्रों ने उन्हें अपनी भावनाओं को समझने, जिम्मेदारी महसूस करने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी। कई लोगों ने यह भी कहा कि यह प्रोग्राम उनके लिए पहली बार ऐसा अनुभव था, जिसमें उन्होंने खुद के बारे में सोचने और अंदरूनी शांति से जुड़े विषयों को समझा, और उन्होंने इससे मिली सीख को बहुत महत्व दिया।
एएडिके के अधिकारियों ने भी पूरे देश के पुनर्वास केंद्रों में पीस एजुकेशन प्रोग्राम को आगे जारी रखने के लिए उत्साह दिखाया है। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के कारण वे इन वर्कशॉप्स को जारी रखने की मांग कर रहे हैं।
एएडिके द्वारा ‘शांति शिक्षा कार्यक्रम’ का कार्यान्वयन यह दर्शाता है कि शांति-केंद्रित दृष्टिकोण किस प्रकार राष्ट्रीय पुनर्वास रणनीतियों के पूरक बन सकते हैं। मलेशिया का उदाहरण अन्य देशों के लिए एक अनुकूलनीय मॉडल प्रस्तुत करता है।






