भारत में हजारों लोगों के लिए नए नेत्र चिकित्सा शिविर, प्रेम रावत फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित

नई दिल्ली नेत्र चिकित्सा शिविर में एक नेत्र रोग विशेषज्ञ स्लिट लैंप से एक मरीज की आँखों की जाँच करते हुए

नेत्र चिकित्सा शिविर स्पष्ट अंतर ला रहे हैं

प्रेम रावत फाउंडेशन (टीपीआरएफ) द्वारा प्रायोजित नेत्र शिविरों के एक नए दौर ने हाल ही में भारत में हजारों वंचित लोगों को आंखों की चिकित्सा प्रदान की है।टीपीआरएफ ने इन बेहद सफल चिकित्सा शिविरों को बनाने के लिए प्रेमसागर फाउंडेशन और राजविद्या केंद्र के साथ साझेदारी की।

चिकित्सा शिविर पांच शहरों में कुल १० दिनों की नेत्र चिकित्सा के लिए स्थापित किए गए थे।शिविर में समुदायों के दृष्टिबाधित सदस्यों के लिए जांच, दवा और चश्मे शामिल थे।ये शिविर जनवरी से फरवरी, 2024 तक पूरे उत्तर भारत में – नई दिल्ली, मिर्ज़ापुर, गया, राँची और जयपुर में आयोजित किए गए।प्रेम रावत जी की परिकल्पना को धन्यवाद, की टीपीआरएफ 2003 से इन वार्षिक शिविरों को आयोजित करता आया है।परिणामस्वरूप, इन शिविरों ने आज तक सैकड़ों हजारों लोगों को महत्वपूर्ण नेत्र चिकित्सा प्रदान किया है।

 

Photo collage from bottom left then clockwise to right: an elderly male patient holds an appointment slip as he sits in a Ranchi waiting tent with other patients; eight women in bright traditional Indian attire show their Ranchi eye clinic patient slips; a close-up of a patient's hands as she receives prescription eyeglasses; an optometrist uses a machine to test a female patient's eyes at the Mirzapur eye clinic

नीचे बाएं ओर से घड़ी की दिशा में: रांची के एक प्रतीक्षा कक्ष में एक मरीज अपॉइंटमेंट पत्र को पकडे हुए: स्थानीय महिलाएँ अपने रांची नेत्र शिविर का रोगी पत्र दिखते हुए; शिविर के कर्मचारी एक रोगी को पर्चे के हिसाब से चश्मा देते हैं;मिर्ज़ापुर नेत्र क्लिनिक में एक ऑप्टोमेट्रिस्ट एक मरीज की आँखों का परीक्षण करते हुए

पीड़ादायक आँखों के लिए दृष्टि

भारतीय नेत्र विज्ञान पत्रिका के हाल के अध्ययन के अनुसार, “… भारत में अनुमानित 49.5 लाख अंधे व्यक्ति और 70 करोड़ दृष्टि-हीन व्यक्ति हैं।”महत्वपूर्ण रूप से, यह स्पष्ट करता है, “मोतियाबिंद जैसे अंधेपन के प्रमुख कारणों की पहचान और उपचार में शुरुआती अवधि में की गई सहायता महत्वपूर्ण है, जो अंधेपन और दृष्टि की कमी के प्रसार को कम करने में मदद करती है।”

सौभाग्य से, टीपीआरएफ क्लीनिकों में प्रदान की जाने वाली आधुनिक चिकित्सा के साथ, ऐसी आँखों की लगभग 80% समस्याएँ रोकने या ठीक करने योग्य हैं।इसके अलावा, टीपीआरएफ के नेत्र शिविर भारत में गरीबी से जूझ रहे लोगों के लिए सर्जिकल उपचार को सुलभ बनाने में मदद करते हैं।चूंकि क्लिनिक मोतियाबिंद जैसी स्थितियों का प्रामाणिक निदान करने में सक्षम होते हैं, इसलिए वे मरीजों को सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद हटाने के लिए योग्य बनाते हैं।पेशेवर चिकित्सा निदान के बिना, ऐसे आंखों की स्थिति वाले लोग उपचार के लिए आवेदन करने के योग्य नहीं होते हैं।परिणामस्वरूप, ये अनुपचारित स्थितियाँ लोगों के लिए काम जारी रखना बहुत कठिन बना देती हैं।

संक्षेप में, टीपीआरएफ नेत्र क्लीनिक भारत के गरीबों के लिए तकनीकी रूप से क्या संभव है और वास्तव में क्या संभव है, के बीच अंतर को कम करने में मदद करते हैं।

इसके अतिरिक्त, नेत्र क्लीनिक में मुफ्त दवा, आई ड्रॉप और चश्मा शामिल हैं, जो जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करते हैं।वास्तव में, मुफ्त चश्मे का सरल प्रावधान लोगों को देखने में मदद करने से कहीं अधिक करता है।दृष्टि में सुधार परिवारिक देखभाल का बोझ कम करता है, स्वतंत्रता बढ़ती है, हादसों को रोकने में मदद करता है और पढ़ाई के माध्यम से शिक्षा के अवसर प्रदान करता है।

 

संभावनाओं को देखना

इन क्लिनिकों को संभव बनाने में सहायक होने वाले दानकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए, टीपीआरएफ बोर्ड चेयर लिंडा पास्कोटो परिवारों के लिए वास्तविक लाभों की व्याख्या करती है:

“इन क्लिनिक्स में छात्रों को पढ़ने का अवसर मिलता है और वे माता-पिता को उनके परिवार को चलाने में मदद करते हैं।इनमें से एक क्लिनिक में मैं साक्षी हूँ एक दादाजी को उनके पोते का चेहरा पहली बार पूरी तरह से स्पष्ट रूप से देखते हुए उन्हें उत्साहित देखने का। इस चिकित्सा शिविर को संभव बनाने वाले सभी समर्थकों को धन्यवाद, यह एक अद्भुत परिणाम देता है।”

नई दिल्ली में भारतीय सेवा पुलिस अधिकारी शशवान जसवाल भी क्लीनिक के लिए अपना आभार व्यक्त कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि बेहतर दृष्टि लोगों को दैनिक कार्य अधिक आसानी से करने में सक्षम बना रही है।महत्वपूर्ण रूप से, जसवाल ने बताया कि बेहतर दृष्टि लोगों के जीवन को उन तरीकों से बेहतर बनाने में मदद कर रही है जिनका हमें एहसास नहीं हो सकता है:

“तो यदि आप चल रहे हैं, तो एक किनारा होता है और आप किनारा देख सकते हैं।इसमें अंतर पड़ता है।आंखों को दृष्टि देने पर ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो आप सोच भी नहीं सकते,” जसवाल कहते हैं।

 

Shashwan Jaswal, police officer holds a microphone as he is interviewed in front of the large, white, tented structure of the New Delhi eye clinic

भारतीय सेवाओं के पुलिस अधिकारी शशवान जसवाल का नई दिल्ली नेत्र चिकित्सालय के सामने इंटरव्यू हुआ

हर. एक. मायने रखता है।

टीपीआरएफ द्वारा किए जा रहे कार्यों से प्रेरित होकर अधिकारी जसवाल ने यह कहानी साझा की है जो इसके महत्व पर प्रकाश डालती है।

“एक सुबह, एक लड़का समुद्र के किनारे कुछ करने में व्यस्त था।एक राहगीर ने लड़के को देखा और उससे पूछा कि वह क्या कर रहा है।लड़के ने बताया कि आज सुबह उसने छोटी मछलियों को लहरों के कारण किनारे पर आते देखा था।जब पानी वापस चला गया, तो वे किनारे पर हाँफते रह गये। किनारे पर हजारों मछलियाँ थीं।लड़का मछलियों को उठा रहा था और उन्हें समुद्र में फिर से फेंक रहा था ताकि वे जी सकें।राहगीर हंसने लगा और पूछा, “‘तुम कितनी मछलियाँ बचाने जा रहे हो?’ लड़का ने कहा, ‘अगर मैं 10, या 20, या 100 बचा लूं – उन 100 मछलियों के लिए, मैंने उनके लिए बदलाव लाया।’”

 

दृष्टि का विस्तार

क्लिनिक्स को संचालित करने के लिए, टीपीआरएफ ने दो भारतीय एनजीओ – प्रेमसागर फाउंडेशन और राज विद्या केंद्र के साथ साझेदारी की।इसके अतिरिक्त, ये क्लिनिक दुनिया भर के लोगों के द्वारा उदार योगदानों से संभव होते हैं जो टीपीआरएफ की पहल से लोगों के जीवन में आए बदलाव को देखते हैं।

प्रेम रावतजी द्वारा स्थापित, टीपीआरएफ ने फूड फॉर पीपल, the पीस एजुकेशन प्रोग्राम और अन्य जीवन बदलने वाली पहलों के माध्यम से लाखों लोगों को सम्मान के साथ जीने में मदद की है।

टीपीआरएफ और इसकी पहलों के बारे में यहां और जानें।

 

 

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