विज्ञान और इंजीनियरिंग जैसी तकनीकी विधाएं आमतौर पर तेज़ गति वाले और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल के लिए जानी जाती हैं, न कि शांति निर्माण, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सहानुभूति से जुड़ी पहलुओं के लिए। लेकिन भारत के हैदराबाद शहर के पास स्थित सीवीआर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग अब इस अंतर को पाटने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। हाल ही में कॉलेज ने एक ऐसा परिवर्तनकारी कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को उनके आंतरिक कल्याण से जोड़ना और व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देना है।
यह कदम न केवल इस संस्थान के लिए, बल्कि पूरे इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए एक बदलाव का संकेत है—यह मान्यता कि नवाचार और प्रगति तब और फलती-फूलती है, जब उन्हें आत्मचिंतन और भीतर झाँकने के लिए एक शांतिपूर्ण वातावरण भी मिलता है।
हाल ही में सीवीआर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने द प्रेम रावत फाउंडेशन (TPRF) द्वारा विकसित पीस एजुकेशन प्रोग्राम , का आयोजन किया ।“बिल्डिंग ब्रिजेस: पीस एजुकेशन फॉर फ्यूचर इंजिनीयर्स ” नामक एक नई पहल के अंतर्गत इस 10 सत्रों की श्रृंखला का आयोजन किया गया, जिसमें कॉलेज के 70 प्रथम वर्ष के छात्र और शिक्षक शामिल हुए। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने आशा, चयन और गरिमा जैसी दस ऐसी थीम्स को खोजा जो संपूर्ण मानवता से संबंधित हैं।
“एक छात्र के रूप में, जहाँ हर कोई पहले आने की दौड़ में है और पढ़ाई को केवल रटने और नंबर वन बनने का जरिया मानता है, मुझे लगता है कि यह पीस एजुकेशन प्रोग्राम इस बात को समझने में वाकई मददगार है कि पढ़ाई के बाहर भी आपकी अपनी एक अहमियत है।” – गुफरान, सीवीआर कॉलेज के छात्र
पीस एजुकेशन प्रोग्राम अब तक 80 से अधिक देशों में प्रस्तुत किया जा चुका है और यह 46 भाषाओं में उपलब्ध है। भारत में उच्च शिक्षा क्षेत्र में इस कार्यक्रम के विस्तार को द प्रेम रावत फाउंडेशन (TPRF) और स्वयं प्लस(SWAYAM Plus) के बीच साझेदारी के माध्यम से समर्थन मिला है। स्वयं प्लस भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालय और कॉलेज के छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षणिक पाठ्यक्रम प्रदान करना है।
इस सहयोग से पीस एजुकेशन प्रोग्राम की पहुँच और दृश्यता दोनों बढ़ी हैं, जिससे देश भर के और अधिक छात्रों को इस कार्यक्रम से जुड़ने और स्वयं की गहराई को समझने का अवसर मिल रहा है।
जुलाई 2024 में, TPRF ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया, जिसके तहत पीस एजुकेशन प्रोग्राम को SWAYAM Plus प्लेटफ़ॉर्म में एकीकृत किया गया। इस साझेदारी के माध्यम से कई ऑनलाइन बैच आयोजित किए गए। बाद में, फरवरी 2025 में, SWAYAM Plus के ज़रिए इस कार्यक्रम को वर्चुअली पूरा कर चुके CVR कॉलेज के छात्र और पीस एजुकेशन प्रोग्राम के स्वयंसेवकों ने कॉलेज में आयोजित ” नवीकरणीय ऊर्जा, हरित संगणना और सतत विकास दूसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन” के दौरान एक आउटडोर बूथ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने छात्रों को पीस एजुकेशन से सीधे जुड़ने का अवसर दिया। इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख ने छात्रों के लिए इस कार्यक्रम को प्रत्यक्ष रूप से (in-person) कराने की सिफारिश की। इन प्रयासों के फलस्वरूप, SWAYAM Plus के सहयोग से CVR कॉलेज में पहली बार इन-पर्सन वर्कशॉप्स आयोजित की गईं, जिससे यह पहल और भी व्यापक रूप से आकार लेने लगी।

कई छात्रों के लिए पीस एजुकेशन प्रोग्राम ने आत्मचिंतन और आत्मबोध के लिए एक सकारात्मक और स्थिर स्थान प्रदान किया।
“इस दुनिया में जहाँ हर कोई भाग-दौड़ में लगा है, यह कार्यक्रम एक मजबूत सहारे की तरह है,” सीवीआर कॉलेज में इन-पर्सन सेशन्स में भाग लेने वाले छात्र गुफरान ने कहा।
“एक छात्र के रूप में जहाँ हर कोई पहले आने की दौड़ में है और पढ़ाई को केवल याददाश्त का जरिया मानता है और नंबर वन बनने की कोशिश करता है, मुझे लगता है कि यह कार्यक्रम पढ़ाई के बाहर अपनी असली कीमत को समझने में बहुत मददगार है।”
सीवीआर कॉलेज की एक और छात्रा, श्रद्धा ने कहा,
“यह कार्यक्रम हमारे लिए आत्म-खोज की एक यात्रा रही है। इसने हमें न केवल खुद को बेहतर समझने में मदद की, बल्कि हमें रुकने, सोचने और खुद से और एक-दूसरे से फिर से जुड़ने का अवसर भी दिया।”
डॉ. जी. श्री लक्ष्मी, प्रोफेसर और इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख, ने इस कार्यक्रम का वर्णन छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए एक आत्मचिंतन के अनुभव के रूप में किया। उन्होंने कहा,
“इस कार्यक्रम ने मुझे अपने उद्देश्य से फिर से जुड़ने में मदद की और एक शिक्षक तथा एक इंसान के रूप में मेरी सोच को व्यापक बनाया। मैंने देखा कि छात्रों ने कितनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी—वे अधिक विचारशील, संयमित और सक्रिय हो गए हैं।”
एक समारोह के दौरान, जिसमें प्रमाणपत्र वितरण और वृक्षारोपण शामिल था, विश्वविद्यालय प्रशासन के सदस्य—जहाँ सीवीआर कॉलेज के प्राचार्य, उप-प्राचार्य और विभागाध्यक्ष भी शामिल थे—सभी ने इस कार्यक्रम के प्रभाव की सराहना व्यक्त की।
इस आयोजन में इस कार्यक्रम को विश्वविद्यालय के इतिहास में “एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर” के रूप में सम्मानित किया गया। साथ ही, प्राचार्य ने द प्रेम रावत फाउंडेशन के साथ जारी सहयोग में गहरी रुचि जताई ताकि पीस एजुकेशन प्रोग्राम को कॉलेज में एक नियमित पहल के रूप में स्थापित किया जा सके।

पीस एजुकेशन प्रोग्राम ने छात्रों में गहरी स्पष्टता और आंतरिक शक्ति विकसित करने में मदद की।
एक छात्र प्रतिभागी, हर्षित, ने आत्म-अभिव्यक्ति के एक लेखन अभ्यास में कार्यक्रम के एक मुख्य विषय, गरिमा (dignity), पर अपनी भावना व्यक्त करते हुए लिखा:
“गरिमा वह कोमल वजन है जो आत्म-सम्मान के साथ चुपचाप गर्व से उठाया जाता है। यह आपकी आँखों में वह शांति है जब दुनिया आपको हिलाने की कोशिश करती है, वह तरीका है जिससे आप अराजकता के बीच भी अपनी नर्मी खोए बिना चलते हैं।”
TPRF द्वारा संचालित पीस एजुकेशन प्रोग्राम उन क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण पूरक है, जैसे विज्ञान और इंजीनियरिंग, जहाँ गति, सटीकता और तकनीक प्रमुख होती हैं। यह कार्यक्रम भविष्य के नवप्रवर्तकों को आत्म-चिंतन और मानसिक दृढ़ता के साथ स्थिरता प्रदान करता है। इस मजबूत आधार के साथ, छात्र न केवल अपने तकनीकी क्षेत्रों में नेतृत्व करने के लिए बेहतर तैयार होते हैं, बल्कि वे अपने अंदर की स्पष्टता और उद्देश्य के साथ कार्य करने में सक्षम भी होते हैं।






